ट्रम्प के द्वारा ईरान के सेनाध्यक्ष की बेपरवा हत्या — मध्य-पूर्व में युद्ध की घोषणा है!

Kevin B. Anderson

अंतर्राष्ट्रीय मार्क्सवादी-मानववादी संगठन न केवल नवउदारवाद किंवा ट्रम्पवाद, बल्कि सम्पूर्ण पूंजीवादी व्यवस्था के खात्मे का आह्वान करती है.हम पूंजी एवं पूंजीपति-वर्ग के खिलाफ संघर्ष करने के साथ साथ नस्ल,लिंग, लैंगिक पहचान के आधार पर मौजूद तमाम उत्पीड़नों के खिलाफ भी संघर्षरत हैं. हमारा लक्ष्य है पूंजीवाद के एक ऐसे विकल्प को विकसित एवं परियोजित करना ताकि  आज़ादी के लिए जारी तमाम संघर्षों को दिशा मिले एवं एक नए मानवसमाज की ओर हम अग्रसर हो सकें.

Translated by
Arvind Ghosh

Download ArticleFile size: 72.36 KB

English original

मध्यपूर्व एवं सम्पूर्ण विश्व के लोगों को जनवरी 3 सुबह यह चौकाने वाली खबर मिली की अमरीकी मिसाइल्स ने बग़दाद हवाई अड्डे पर हमला की है जिसमे ईरान के सेनाध्यक्ष को निशाना बनाकर उनकी हत्या कर दी गई है.

डोनल ट्रम्प के द्वारा की गई यह नृशंस हत्या वास्तव में ईरान के खिलाफ युद्ध की घोषणा है.बल्कि यों कहा जाए कि यह आक्रमण साम्राज्यवादी शक्तियों के द्वारा मध्यपूर्व में आज तक किये गए तमाम धुष्ट क्रियाओं की बराबरी करने वाली घटना है.

बग़दाद हवाई अड्डे पर अमरीकी मिसाइल हमला इराक में अमरीकी दूताबास के बाहर ईरान समर्थक उग्रवादी लड़ाकुओं का 2 दिन व्यापी प्रदर्शन के बाद किया गया था.यह प्रदर्शन ईरानी उग्रवादिओं के खिलाफ अमरीकी हवाई हमलों के विरोध में संगठित की गई थी.अमरीकी सेना के एक ठेकेदार की इन उग्रवादिओं के द्वारा हत्या के जवाब में यह हवाई हमले किये गए थे.एक विदेशी नेता सोलेमन की हत्या न केवल अमरीकी तथा अन्तरराष्ट्रीय  कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि यह इराकी सार्वभोमिकता का भी घोर अतिक्रमण है.विशेष तौर पर इसलिए कि अमरीका ने दावा किया है कि उसने कई सारे ईरान समर्थक उग्रवादियों को इराक के धरती पर “गिरफ्तार” किया है. कुल्हे से आग लगानेवाली ट्रम्प का यह असाधारण युद्धबाज़ कृत्य हमें 2003 में इराक के खिलाफ जॉर्ज बुश के द्वारा छेड़ा गया युद्ध अथवा 1989 में उनके पिता के द्वारा पनामा पर हमले की याद दिलाती है.यह हमला अमरीकी जनसाधारण के भावनाओं को भी ठेस पहुंचाती है. अमरीकी जनसाधारण आज मध्यपूर्व में एक और युद्ध में उलझने के लिए बिलकुल इच्छुक नहीं है.अगर इराक युद्ध एक आपदा थी तो इराक से कई गुणा बड़ा एक देश से युद्ध में उलझने का क्या नतीजा होगा, जहाँ का शासकवर्ग मजबूती से सत्तानशीन है एवं जिनके साथ उनके महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मित्र राष्ट्र मौजूद है?

लेकिन ट्रम्प द्वारा किया गया हमला ठीक इसी तरह के युद्ध को न्योता देता है, क्योंकि ईरान इसका जवाब अपने ढंग के किसी हमले से दे सकता है, जिसके बाद अमरीका आसानी से ईरान पर बमबारी कर सकता है—जिसका परिणाम तीव्रता से युद्ध के विस्तार में होगा.

सोलेमानी ईरान की सेना (IRGC) में सर्वोच्य पदाधिकारी कमांडर थे एवं देश की सैनिक रणनीति के रचेता थे. ईरान के क्षेत्रीय साम्राज्यवादी राजनीति के प्रमुख शक्ति के रूप में सोलेमानी सीरिया एवं लेबनान के राजनीति में हस्तक्षेप करते रहे हैं, जहाँ उनके द्वारा समर्थित एवं प्रशिक्षित लड़ाकू उग्रवादी खुनी आसाद के शासन को सीरियन क्रांति के असर से बचे रहने एवं लेबानोन पर शासन कायम रखने में मदत करते थे.इसके आलावा सोलेमानी इराक में भी राजनीतिक मध्यस्त (Arbiter) थे जो इराक के प्रधानमंत्री को न केवल सत्ता पर ला सकते थे बल्कि सत्ता से गिरा भी सकते थे. उनके द्वारा प्रशिक्षित एवं समर्थित लड़ाकुओं ने मोसुल एवं उत्तरी इराक से आई.एस.आई.एस (I.S.I.S) को खदेड़ा था.

हाल के महीनों में ईरानी शासन एवं इनके क्षेत्रीय सहयोगी राज्यों के शासन क्रांतिकारी नवजवानों के आन्दोलन के दवाव में  रहें हैं.यह आन्दोलन लेबनान, इराक एवं सर्वाधिक ईरान में जारी था.यह आन्दोलनें, जिनके अगुआ-दस्ता नौजवान एवं स्त्रियां थी अपने अपने देशों के सत्ताधारियों के तानाशाही प्रवृत्ति, भ्रष्टाचार, धार्मिक संकीर्णता एवं बेहिसाब आर्थिक असमानता के खिलाफ हमला था. लेकिन ट्रम्प के द्वारा किया गया हमला ईरानी शासकवर्ग एवं इसके सहयोगिओं को इन आन्दोलनकरिओं पर और अधिक दमन के लिए वैचारिक एवं तार्किक हथियार देगी.

हालाँकि सोलेमानी के मौत का शोक मनाने की आवश्यकता नहीं है– उनकी हत्या ने एक डरावना स्थिति पैदा की है. मध्यपूर्व में एक और युद्ध का डर—जो अनुअस्त्रों से सज्जित अमरीका एवं एक कट्टरपंथी शिया शासन के बीच लड़ा जायेगा जिसके पास पर्याप्त प्रमाण में मिसाइल्स एवं द्रोंस है तथा आणविक क्षमता की संभावना मौजूद है. डर इस बात का कि ईरानी शासन एवं उनके सहयोगी देशों के शासन  सोलेमान के “शहीद” होने का फ़ायदा उठायेंगे ताकि इन देशों के  शासकवर्ग के खिलाफ आम लोगों की नफरत को कम किया जा सके. आम लोगों के नफरत के ही फलस्वरूप ईरान एवं इस क्षेत्र में बदलाव के लिए कुछ सकारात्मक आन्दोलनें हो रही थी. डर उन सभी लोगों के लिए है- जो आगामी हफ़्तों में यहाँ मौत के शिकार हो सकते हैं.

यही समय है रास्तों पर उतरने का — ट्रम्प के बेपरवा सैन्यवाद के खिलाफ, लेकिन ईरानी शासन एवं इनके सहयोगिओं की हमारी आलोचना को किसी भी माने में कम न करते हुए!

LEAVE A REPLY

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

0 Comments

FROM THE SAME AUTHOR